Gangs of Wasseypur: Faizal Khan trapped

गैंग्स ऑफ़ वास्सेय्पुर के आज का सीन थोड़ा लम्बा है और इसमें २ किस्से समानांतर चल रहे हैं|
 
एक तरफ रामाधीर ने अपना मोहरा, शमशाद आलम छोड़ा हुआ है जो फैज़ल को धंदे में चोट देने पर अमादा है तो वहीँ दूसरी तरफ सुल्तान धीरे धीरे अपना पंजा कस रहा है, फैज़ल के छोटे सौतेले भाई परपेंडिकुलर पर |

 
शमशाद ने बाजार से फैज़ल का नाम इस्तेमाल कर १५ का माल १० पर उठाया और ७५ में बेच दिया, पर फैज़ल को बोला कि माल २० का था, और इसमें बीच में १० तो बनाये ही, साथ ही फैज़ल की नाक के नीचे से माल खींच लिया |
 
उधर सुल्तान के आदमी परपेंडिकुलर की दिनचर्या पर चील की भाँती नज़र गाढ़े बैठे थे | आजकल परपेंडिकुलर पर मुन्ना भाई का भूत चढ़ा हुआ था और वह रोज़ उस फिल्म को देखने सनीमाघर जाया करता था | इससे हमको पता चलता है कि यह किस्सा लगभग सन २००३ के आसपास का है|
 
शमशाद को पता था कि फैज़ल तक कीमतों की हेराफेरी की खबर पहुंचेगी और जब ऐसा होता है तो वो फोन पर डरने का नाटक करता है, फैज़ल तैश में आकर उसको धमकी दे देता है कि जितना कमाया है, हमको चाहिए |
 
शमशाद को इसी मौके की तलाश थी, वह जा पहुँचता है पुलिस के पास और पुलिस को उकसाता है कि बाजार में खबर चल रही है कि पुलिस फैज़ल के यहाँ रोज़ अपनी इज़्ज़त नीलाम करवाने जाती है और फिर वहीँ फैज़ल के आदमी को फ़ोन करके बोलता है कि माल की डिलीवरी आ गयी है|
 
फैज़ल तुरंत पलट के फ़ोन करता है और अपना हिस्सा मांगता है, शमशाद देने से मना कर देता है, तो फैज़ल उसको खरी खोटी सुनाता है, पुलिस समझ जाती है और फैज़ल को पकड़ने निकल पड़ती है|
 
इधर सुल्तान और उसके आदमी परपेंडिकुलर और उसके दोस्त को धर दबोचते हैं, उसका दोस्त तो किसी तरह अपनी जान बचा कर भाग लेता है पर परपेंडिकुलर उस दिन गिर कर धराशायी हो जाता है|
 
जब फैज़ल खान तक यह खबर पहुँचती है तो वो आग बबूला हो परपेंडिकुलर को ढूंढने निकल पड़ता है, इधर उसको अपने भाई का शव मिलता है, उधर पुलिस उसको अपनी गिरफ्त में ले लेती है | और तभी मध्यांतर होता है |
 
कहानी के इस मोड़ तक फैज़ल खान का वर्चस्व अपनी चरम सीमा पर था|
सरदार खान का वह निकम्मा चरसी गंजेड़ी बेटा जिससे किसी भी तरह की कोई अपेक्षा नहीं की जा सकती थी, आज ना केवल सरदार खान का कारोबार चला रहा था, बल्कि अब फैज़ल का दबदबा था, सिर्फ उसके नाम से काम हो जाता था, रामाधीर को यह बात फूटी आँख ना भाती थी, और इसीलिए उसने सुल्तान और शमशाद दोनों को लगाया फैज़ल को उलझाने के लिए, वहीँ दूसरी तरफ फैज़ल सातवे आसमान पर सवार था, ताकत और वर्चस्व के नशे में, उसे पता ही नहीं चला कब शमशाद ने उसको पुलिस के चंगुल में फंसा दिया और तभी सुल्तान ने उसके भाई को मार दिया, फैज़ल खान जेल पहुँच जाता है |
 
ऐसा हमारे साथ ज़िन्दगी में अक्सर होता है जब हम सफलता पर इतना एकत्रित हो जाते हैं कि आने वाले तूफ़ान और विनाश की हमको भनक तक नहीं लग पाती और हम हाथ मलते रह जाते हैं |
 
जीवन की एक और कठोर वास्तविकता को दर्शाता यह बेहतेरीन सीन इस बहुमूल्य नग्न – गैंग्स ऑफ़ वास्सेय्पुर का |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *