Gangs of Wasseypur: Ramadheer gets candid with his son

आज हम गैंग्स ऑफ़ वास्सेय्पुर के एक बहुत ही महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक सीन की समीक्षा करेंगे|
 
“चिराग तले अँधेरा” वाली कहावत का जिवंत उदाहरण है यह सीन |

 
सीन की पृष्ठभूमि कुछ इस प्रकार है| फैज़ल खान अपने बाप सरदार खान पर गोली चलाने वाले का बीच बाज़ार मुंडन करवा के गोली मार के हत्या कर देता है, वह सुल्तान का आदमी था, तो सुल्तान इस पर आग बबूला होके रामाधीर के बेटे को फ़ोन लगाता है|
 
पर चूँकि रामाधीर का बेटा निकम्मा है, वह केवल पोस्टमैन का काम करता है और बिना सोचे समझे रामाधीर की बैठक में जा के सुल्तान का नाम ले लेता है, तो रामाधीर उसको हड़का के भेज देता है |
 
बाद में अलग से बात करता है और पहले तो ताना कसता है कि जन साधारण के सामने गुंडों का नाम ना लिया करे, पर सुपुत्र जी के कानों पर जूँ तक ना रेंगती इस बात से और वह अपनी हरकत की पुष्टि देने लगता है जैसे मानों कोई पहाड़ टूट गया हो |
 
दरअसल रामाधीर ने अपने दुश्मन, सरदार खान को ख़त्म करने के लिए सुल्तान का इस्तेमाल किया था और अब उसको सुल्तान या उसके आदमियों की कोई ज़रुरत नहीं थी, अतैव उसको रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ रहा था कि सुल्तान या उसके आदमियों के साथ क्या होता है |
 
पर यह बात रामाधीर के बैल बुद्धि बेटे को कहाँ समझ आनी थी| वह तर्क करता रहा, तो इस पर रामाधीर ने उसको पूछ ही लिया कि पिछली रात को वह क्या कर रहा था, तो इस पर सुपुत्र जी ने कहा, वे “दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे” सनीमा देखने गया था |
 
रामाधीर समझ जाता है कि कपूत पैदा हुआ है उसके यहाँ और उसका बरसों का बनाया हुआ यह वर्चस्व का साम्राज्य उसके साथ ही ख़त्म होने वाला है, और इसीलिए उसने अत्यंत निराशाजनक मन से कहा – “बेटा, तुमसे ना हो पायेगा, हमें तुम्हारे लक्षण बिलकुल ठीक नहीं लग रहे, तुमसे ना हो पायेगा”
 
यह सीन जीवन के एक कठोर सत्य को दर्शाता है कि पिता अतिशक्तिशाली हो या शातिर और चालाक हो तो उसका पुत्र उतना ही बुड़बक होता है और इस बात के जिवंत उदाहरण आम ज़िन्दगी में खोजना मुश्किल नहीं|
 
और इसी तरह वास्तविकता और कल्पना का अद्भुत संगम बन, यह सीन भी हिंदी सिनेमा का एक बेशकीमती हीरा बन के रह गया |

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