Gangs of Wasseypur: Ramadheer Singh talks about Cinema

श्रृंखला को जारी रखते हुए आज हम गैंग्स ऑफ़ वास्सेय्पुर के उस सीन की बात करेंगे जहाँ शमशाद आलम डेफिनिट द्वारा किये गए हमले से बच जाता है क्योंकि हमले के समय डेफिनिट की पिस्तौल अटक जाती है, और जब शमशाद उसके पीछे भागता है तो डेफिनिट भी बच निकलता है

इस एक सीन में निर्देशक ने यह स्थापित कर दिया है कि रामाधीर सिंह कितना शातिर है|

रामाधीर कहता है वास्सेय्पुर लकड़बग्घों का जंगल है, और यहाँ ज़िंदा रहना है तो मारना है | और फिर वह गिनाता है कि किस तरह उसने सरदार खान के अब्बू को मारा, फिर सरदार को मारा, फिर उसके बड़े बेटे दानिश को मारा और अब सरदार खान के छोटे बेटे, फैज़ल खान को डेफिनिट के हाथों मरवाने की तैयारी हो रही है |

शमशाद को शक है कि डेफिनिट फैज़ल को मार पायेगा, पर रामाधीर को यकीन है कि वह मार देगा और इस बात पर रामाधीर का यादगार संवाद – “जैसे लोहा लोहे को काटता है, वैसे चूत्या ही ना चूतिये को मारेगा”

पर इसके बाद एक बहुत ही सुन्दर लिखे हुए संवाद के माध्यम से रामाधीर कहता है कि जब तक हिंदुस्तान में सनीमा रहेगा, लोग चूत्या बनते रहेंगे|

ध्यान देने वाली बात यह है कि रामाधीर का किरदार निभाया है तिग्मांशु धुलिया ने, जो कि स्वयं एक सफल एवं क्रन्तिकारी निर्देशक हैं, और केवल अनुराग कश्यप जैसा निडर निर्देशक ही एक सनीमा में यह बात कह सकता है कि “जब तक हिंदुस्तान में सनीमा रहेगा, लोग चूत्या बनते रहेंगे”

कहने का तात्पर्य यह है कि सनीमा एक मनोरंजन का माध्यम है और उसको वही रहने दिया जाए, पर ऐसा बहुधा होता है कि जवान लड़का लड़की सनीमा से वशीभूत हों अपना जीवन विचलित कर लेते हैं, और पथ भ्रमित हो जाते हैं, सनीमा की अंधी देखादेखी में|

एक और बेहतरीन उदहारण सनीमा के माध्यम से मनोरंजन बनाये रखते हुए अपनी बात कह देना, और इन्ही छोटे छोटे कारणों की वजह से आज ५-६ साल के बाद भी इस फिल्म का जादू बरक़रार है|

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