Gangs of Wasseypur: Sultan Killed

गैंग्स ऑफ़ वास्सेय्पुर की श्रृंखला में आज हम बात करते हैं उस सीन की जहाँ सुल्तान को मारा जाता है|

स सीन की सबसे मज़ेदार बात यह है कि इसमें जिस सुंदरता से निर्देशक ने हास्य रस और वीर रस को संजोया है वह अपने आप में अद्भुत और अद्वितीय है |

पूरी प्लानिंग में ४ लोग हैं, ३ मार्किट में सुल्तान की अलग अलग गतिविधियों पर नज़र रखे हुए और एक फ़ोन पर उन सब में आपसी तालमेल बनाते हुए|

हालाकि सुल्तान को मारना आसान नहीं है और फैज़ल खान के खानदान का काफी नुकसान किया था उसने, पर अनुराग कश्यप ने जिस तरह से इस सीन को दर्शाया है, उन्होंने इसे मनोरंजन की चरम सीमा पर पहुंचा दिया है|

फ़ोन वाला बंदा दोनों से एक ही साथ फ़ोन पर बात भी करता है और अपना पैजामा भी बांधता है, यह जीवन की वास्तविक्ता को दर्शाता है, कि कैसे हम लोग अक्सर परिस्थितियों की गंभीरता को समझे बिना अट्टहास पर उतारू रहते हैं और एकाएक परिस्थिति सामने आ जाती है और हमें तुरंत कुछ ना कुछ कदम उठाना पड़ता है|

जैसे यहाँ डेफिनिट उस फ़ोन वाले से लड़ रहा था कि उसका फ़ोन क्यों काट दिया, उसको हेलमेट पहना के धुप में खड़ा कर के बोला कि बाइक को किक मारता रह और उधर वह फ़ोन वाला दुसरे आदमी के साथ कटहल की सब्ज़ी पर चर्चा कर रहा है कि उसकी कितनी वांदगी बन सकती है और बस तभी डेफिनिट के समक्ष आ धमकता है सुल्तान और डेफिनिट अपनी पूरी पिस्तौल उस पर खली कर देता है |

एकाएक सीन हास्यपद से संजीदा हो जाता है और दर्शक मंत्रमुग्ध कि यह हुआ क्या ?

और इसी के साथ समाप्त होती है एक और बेहतरीन सीन की समीक्षा, यदि पसंद आयी हों तो कमेंट ज़रूर करें और साँझा भी कर दें

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